सरकारी योजना

PM-KUSUM योजना: किसानों को सोलर से ₹20 लाख कमाई का मौका — जानिए कैसे और अभी क्या करें

PM-KUSUM योजना के तहत किसान सोलर प्लांट लगाकर ₹20 लाख तक सालाना कमाई कर सकते हैं। Component-A, B, C की जानकारी, सब्सिडी संरचना, आवेदन प्रक्रिया और PM-KUSUM 2.0 अपडेट यहाँ पढ़ें।

राज कुमार

राजनीति संवाददाता

Published: 1 March 2026

Reading time

14 min

अगर आपके पास खेती की जमीन है — चाहे उपजाऊ हो, बंजर हो या अर्ध-कृषि योग्य — तो केंद्र सरकार की PM-KUSUM योजना किसान सोलर कमाई का यह सुनहरा अवसर आपके लिए है। 30 नवम्बर 2025 तक देश के 20 लाख 42 हज़ार से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा चुके हैं, और बजट 2026-27 में इसके आवंटन को लगभग दोगुना करते हुए ₹5,000 करोड़ कर दिया गया है। यह संकेत है कि सरकार किसानों को 'अन्नदाता' के साथ-साथ 'ऊर्जादाता' बनाने पर पूरी ताकत से काम कर रही है।

अभी क्या करें: अगर आप 2 MW तक का सोलर प्लांट लगा सकते हैं या अपनी जमीन लीज़ पर देना चाहते हैं, तो अपने राज्य के DISCOM (वितरण कंपनी) की वेबसाइट या राष्ट्रीय पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in पर आवेदन करें। Component-B के तहत सोलर पंप के लिए केवल 10% लागत खुद चुकानी होती है और सालाना कम से कम ₹60,000 की डीज़ल बचत होती है।

क्या है PM-KUSUM योजना?

मार्च 2019 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान — यानी PM-KUSUM — लॉन्च किया। इसका मकसद स्पष्ट था: किसानों को सस्ती, भरोसेमंद और स्वच्छ ऊर्जा देना और उनकी आमदनी बढ़ाना। योजना मार्च 2026 तक 34,800 MW सौर क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखती है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने कुल ₹34,422 करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है।

इस योजना के तीन घटक हैं जो मिलकर कृषि क्षेत्र में ऊर्जा का कायापलट करते हैं।

Component-A के तहत 500 kW से 2 MW तक के ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट लगाए जाते हैं। किसान, FPO, पंचायत या सहकारी समितियाँ इन्हें अपनी जमीन पर खुद लगा सकते हैं या किसी डेवलपर को जमीन लीज़ पर दे सकते हैं। उत्पादित बिजली 25 साल के PPA (Power Purchase Agreement) के तहत DISCOM को बेची जाती है।

Component-B में ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में 7.5 HP तक के स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाए जाते हैं। यह उन किसानों के लिए है जहाँ ग्रिड बिजली उपलब्ध नहीं है।

Component-C में मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों को सोलर से जोड़ा जाता है। किसान अपनी ज़रूरत की बिजली खुद पैदा करते हैं और अतिरिक्त बिजली DISCOM को बेचकर कमाई करते हैं।

क्या आधिकारिक पुष्टि कहती है?

दिसम्बर 2025 में राज्यसभा में दिए एक लिखित उत्तर में केंद्रीय राज्य मंत्री (नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा) श्रीपाद येसो नाईक ने स्पष्ट किया कि PM-KUSUM एक 'डिमांड-ड्रिवन' योजना है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की माँग और प्रगति के आधार पर फंड जारी किए जाते हैं। मंत्री ने बताया:

  • 20,42,443 किसान 30 नवम्बर 2025 तक लाभान्वित हुए
  • चार वर्षों में ₹6,300 करोड़ से अधिक फंड जारी किया गया
  • FY 2025-26 की पहली छमाही में ₹2,031.5 करोड़ जारी हो चुके हैं
  • महाराष्ट्र में 11.2 लाख से अधिक लाभार्थियों के साथ पहले स्थान पर, उसके बाद राजस्थान, गुजरात और हरियाणा

₹20 लाख कमाई — कैसे होगी?

यही वह सवाल है जो हर किसान पूछता है। आंकड़ों को समझें: Component-A में 2 MW का सोलर प्लांट लगाने पर सालाना 16-18 लाख यूनिट बिजली पैदा होती है। अगर DISCOM ₹3 प्रति यूनिट की दर से खरीदे, तो सालाना राजस्व ₹48 लाख तक हो सकता है। ऑपरेशन-मेंटेनेंस और वित्त लागत निकालने के बाद भी शुद्ध आय ₹20-25 लाख प्रति वर्ष के स्तर पर पहुँच सकती है (यह अनुमानित आंकड़ा है, वास्तविक आय टैरिफ और स्थान पर निर्भर करती है — आधिकारिक पुष्टि नहीं)।

सरकार खुद कह चुकी है कि Component-A के कमीशन किए गए प्लांट्स में मेडियन आय ₹4.5 लाख प्रति MW प्रति माह रही है। यानी 2 MW के प्लांट से सालाना ₹1.08 करोड़ तक की आय भी संभव है — लेकिन यह मेडियन आंकड़ा है, न्यूनतम गारंटी नहीं।

जमीन लीज़ पर देने के मामले में: Component-A में किसान ₹80,000 प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक कमा सकते हैं, जबकि Component-C में यह ₹25,000 प्रति एकड़ प्रति वर्ष है।

डेटा टेबल: PM-KUSUM के मुख्य आंकड़े

विवरणआंकड़ास्रोत
कुल सौर क्षमता लक्ष्य (मार्च 2026 तक)34,800 MWMNRE आधिकारिक वेबसाइट
केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA)₹34,422 करोड़MNRE आधिकारिक वेबसाइट
कुल लाभार्थी (30 नव. 2025 तक)20,42,443DD News रिपोर्ट
बजट 2025-26 आवंटन₹2,600 करोड़IBEF रिपोर्ट
बजट 2026-27 आवंटन (अनुमानित)~₹5,000 करोड़The Week लेख
FY25 में Component-B पंप (लगाए गए)4.4 लाखIBEF रिपोर्ट
FY25 में Component-C पंप (सोलराइज़्ड)2.6 लाखIBEF रिपोर्ट
कुल सोलर पंप (स्थापित/सोलराइज़्ड)10 लाख+IBEF रिपोर्ट
Component-A: जमीन लीज़ आय₹80,000/हे./वर्षDD News रिपोर्ट
Component-B: डीज़ल से वार्षिक बचत₹60,000+DD News रिपोर्ट
Component-C: जमीन लीज़ आय₹25,000/एकड़/वर्षDD News रिपोर्ट

सब्सिडी संरचना — कितना लगाना होगा?

Component-B (स्टैंडअलोन सोलर पंप): केंद्र सरकार बेंचमार्क लागत का 30% सब्सिडी देती है, राज्य सरकार कम से कम 30% और शेष 40% किसान का हिस्सा होता है। लेकिन किसान बैंक लोन ले सकता है — यानी शुरुआत में सिर्फ 10% नकद चुकाना होता है।

पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों (J&K, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, लक्षद्वीप, A&N द्वीप) में केंद्र की सब्सिडी 50% है।

Component-A (ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट): इसमें किसान को कोई सरकारी पूंजी सब्सिडी नहीं मिलती। हालाँकि SBI जैसे बैंक प्रोजेक्ट लागत का 70% तक लोन देते हैं। DISCOM को खरीदी गई बिजली पर 5 साल तक ₹0.40/यूनिट या ₹6.6 लाख/MW प्रति वर्ष (जो भी कम हो) का प्रोक्योरमेंट-बेस्ड इंसेंटिव (PBI) मिलता है।

PM-KUSUM 2.0: अगला चरण तैयार

मौजूदा PM-KUSUM योजना मार्च 2026 में समाप्त हो रही है। अच्छी खबर यह है कि सरकार इसे एक नए और बेहतर रूप में — PM-KUSUM 2.0 — के तौर पर लाने की तैयारी कर चुकी है। Down to Earth की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2025 में एक बड़ी स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन हुई और Expenditure Finance Committee (EFC) की मंजूरी मिल चुकी है।

Business Today की रिपोर्ट के अनुसार PM-KUSUM 2.0 में कुल आवंटन ₹50,000 करोड़ तक हो सकता है — मौजूदा ₹34,422 करोड़ से करीब 45% अधिक। नई योजना में Feeder Level Solarisation पर ज़ोर होगा, Agro-PV (खेती + सोलर एक साथ) तकनीक शामिल हो सकती है और बैटरी स्टोरेज भी जोड़े जाने की संभावना है।

यूनियन बजट 2026-27 में PM-KUSUM के लिए लगभग ₹5,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं — पिछले साल के ₹2,600 करोड़ से लगभग दोगुना।

चुनौतियाँ जो अभी भी बनी हैं

योजना के परिणाम उत्साहजनक हैं, पर चुनौतियाँ बड़ी हैं। Down to Earth की दिसम्बर 2025 की रिपोर्ट बताती है कि Component-A में 9,964 MW स्वीकृत हुए, पर अब तक सिर्फ 667.3 MW स्थापित हो सके हैं। यानी 93% क्षमता ज़मीन पर नहीं उतरी। इसके प्रमुख कारण हैं — सब-स्टेशन के पास की जमीन का न मिलना, DISCOMs की धीमी प्रतिक्रिया और वित्त जुटाने में किसानों को कठिनाई।

Component-C की तस्वीर बेहतर है — 35.8 लाख MW के लक्ष्य के मुकाबले 10.99 लाख MW सोलराइज़ हो चुके हैं। FY25 में 25 गुना छलाँग उल्लेखनीय है।

राज्यों के बीच भी असमानता साफ दिखती है। महाराष्ट्र ने FY25 में ₹1,154 करोड़ (कुल फंड का 58%) खर्च किए, जबकि कई राज्य अभी भी पीछे हैं।

आवेदन कैसे करें — Step-by-Step

Component-B (सोलर पंप के लिए):

  • Step 1: अपने राज्य के State Implementing Agency (SIA) या DISCOM की वेबसाइट पर जाएँ। राष्ट्रीय पोर्टल है — pmkusum.mnre.gov.in
  • Step 2: 'Solar Agriculture Pumpset Subsidy Scheme' के लिए रजिस्ट्रेशन करें।
  • Step 3: आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें: भूमि रिकॉर्ड (खसरा/खतौनी), आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जाति प्रमाण (यदि लागू हो)।
  • Step 4: ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें और सभी जानकारी सटीक दर्ज करें।
  • Step 5: सफल पंजीकरण के बाद कुल लागत का 10% अग्रिम जमा करें।
  • Step 6: DISCOM/SIA द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन के बाद इंस्टॉलेशन शुरू होगी।

Component-A (सोलर प्लांट/ज़मीन लीज़ के लिए):

  • Step 1: नज़दीकी सब-स्टेशन की जानकारी और DISCOM की वेबसाइट पर उपलब्ध लैंड एग्रीगेशन पोर्टल देखें।
  • Step 2: अपनी जमीन का ब्यौरा (लोकेशन, एकड़, खसरा नंबर) दर्ज करें।
  • Step 3: DISCOM Expression of Interest (EoI) के लिए अप्लाई करें।
  • Step 4: चयन होने पर Letter of Award (LoA) मिलेगा और उसके 9 महीने में प्लांट कमीशन होना होगा।

क्या करना चाहिए — प्रभावित किसानों के लिए

  • अगर आपकी जमीन किसी सब-स्टेशन के 5 किमी के दायरे में है, तो Component-A के लिए अभी आवेदन करें।
  • बंजर या अनुपजाऊ जमीन हो, तो उसे लीज़ पर देकर बिना कोई जोखिम के सालाना आय शुरू कर सकते हैं।
  • डीज़ल पंप चला रहे हैं तो Component-B की सब्सिडी से उसे सोलर में बदलें — एक साल में लागत वसूल हो जाएगी।
  • PM-KUSUM 2.0 के लिए दस्तावेज़ तैयार रखें — भूमि रिकॉर्ड, आधार, बैंक खाता अपडेट।
  • राज्य सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी जाँचें — कर्नाटक में 50%, राजस्थान में 50,000 पंप का लक्ष्य।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्र. 1: PM-KUSUM योजना किसान सोलर कमाई में कितनी जमीन चाहिए?

उ: Component-A में 1 MW सोलर प्लांट के लिए लगभग 3-4 एकड़ जमीन की ज़रूरत होती है। अधिकतम 2 MW तक की परियोजना लगाई जा सकती है। बंजर, अर्ध-कृषि या चरागाह भूमि भी पात्र है। पहाड़ी इलाकों में 500 kW से छोटे प्लांट भी मान्य हो सकते हैं।

प्र. 2: क्या Component-A में सब्सिडी मिलती है?

उ: नहीं, Component-A में किसान को सीधी पूंजी सब्सिडी नहीं दी जाती। लेकिन SBI जैसे बैंक 70% तक प्रोजेक्ट लोन देते हैं और DISCOM को PBI (प्रोक्योरमेंट इंसेंटिव) दिया जाता है जो बिजली खरीद को प्रोत्साहित करता है।

प्र. 3: योजना का स्टेटस कैसे जाँचें?

उ: राष्ट्रीय पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in पर अपनी आवेदन संख्या से लॉग इन करें। अपने राज्य की SIA की वेबसाइट पर भी स्टेटस देख सकते हैं। MNRE के Toll-Free Helpline नंबर से भी जानकारी मिलती है।

प्र. 4: PM-KUSUM 2.0 कब से लागू होगी?

उ: मौजूदा PM-KUSUM मार्च 2026 में समाप्त होती है। Budget 2026-27 में ₹5,000 करोड़ के आवंटन से स्पष्ट है कि PM-KUSUM 2.0 जल्द शुरू होगी। EFC की मंजूरी मिल चुकी है और Agro-PV व बैटरी स्टोरेज जैसे नए फीचर्स शामिल होने की संभावना है। किसान अभी से दस्तावेज़ और जमीन की पात्रता जाँचकर तैयार रहें।

मौका अभी है, देर न करें

PM-KUSUM योजना किसान सोलर कमाई के संदर्भ में एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रख चुकी है। 20 लाख से अधिक किसान इस परिवर्तन के हिस्सेदार बन चुके हैं — महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा सबसे आगे हैं। Budget 2026-27 में लगभग दोगुने आवंटन और PM-KUSUM 2.0 की तैयारी इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस योजना को और बड़े पैमाने पर ले जाना चाहती है।

व्यावहारिक सलाह एकदम सीधी है: अगर आपके पास खाली जमीन है — बंजर भी चलेगी — तो pmkusum.mnre.gov.in पर जाएँ, अपने राज्य की DISCOM से संपर्क करें और आवेदन प्रक्रिया शुरू करें। 25 साल का PPA एक स्थिर और दीर्घकालिक आय का ज़रिया बन सकता है। डीज़ल पंप पर निर्भरता खत्म करें, बिजली का बिल शून्य करें — और अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई शुरू करें।