पीएम किसान सम्मान निधि 22वीं किस्त 2026: आज होगी जारी, करोड़ों किसानों को मिलेगा ₹2,000 का तोहफा
By राज कुमार • 12 min read
PM-KUSUM योजना के तहत किसान सोलर प्लांट लगाकर ₹20 लाख तक सालाना कमाई कर सकते हैं। Component-A, B, C की जानकारी, सब्सिडी संरचना, आवेदन प्रक्रिया और PM-KUSUM 2.0 अपडेट यहाँ पढ़ें।

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अगर आपके पास खेती की जमीन है — चाहे उपजाऊ हो, बंजर हो या अर्ध-कृषि योग्य — तो केंद्र सरकार की PM-KUSUM योजना किसान सोलर कमाई का यह सुनहरा अवसर आपके लिए है। 30 नवम्बर 2025 तक देश के 20 लाख 42 हज़ार से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा चुके हैं, और बजट 2026-27 में इसके आवंटन को लगभग दोगुना करते हुए ₹5,000 करोड़ कर दिया गया है। यह संकेत है कि सरकार किसानों को 'अन्नदाता' के साथ-साथ 'ऊर्जादाता' बनाने पर पूरी ताकत से काम कर रही है।
अभी क्या करें: अगर आप 2 MW तक का सोलर प्लांट लगा सकते हैं या अपनी जमीन लीज़ पर देना चाहते हैं, तो अपने राज्य के DISCOM (वितरण कंपनी) की वेबसाइट या राष्ट्रीय पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in पर आवेदन करें। Component-B के तहत सोलर पंप के लिए केवल 10% लागत खुद चुकानी होती है और सालाना कम से कम ₹60,000 की डीज़ल बचत होती है।
मार्च 2019 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान — यानी PM-KUSUM — लॉन्च किया। इसका मकसद स्पष्ट था: किसानों को सस्ती, भरोसेमंद और स्वच्छ ऊर्जा देना और उनकी आमदनी बढ़ाना। योजना मार्च 2026 तक 34,800 MW सौर क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखती है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने कुल ₹34,422 करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है।
इस योजना के तीन घटक हैं जो मिलकर कृषि क्षेत्र में ऊर्जा का कायापलट करते हैं।
Component-A के तहत 500 kW से 2 MW तक के ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट लगाए जाते हैं। किसान, FPO, पंचायत या सहकारी समितियाँ इन्हें अपनी जमीन पर खुद लगा सकते हैं या किसी डेवलपर को जमीन लीज़ पर दे सकते हैं। उत्पादित बिजली 25 साल के PPA (Power Purchase Agreement) के तहत DISCOM को बेची जाती है।
Component-B में ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में 7.5 HP तक के स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाए जाते हैं। यह उन किसानों के लिए है जहाँ ग्रिड बिजली उपलब्ध नहीं है।
Component-C में मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों को सोलर से जोड़ा जाता है। किसान अपनी ज़रूरत की बिजली खुद पैदा करते हैं और अतिरिक्त बिजली DISCOM को बेचकर कमाई करते हैं।
दिसम्बर 2025 में राज्यसभा में दिए एक लिखित उत्तर में केंद्रीय राज्य मंत्री (नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा) श्रीपाद येसो नाईक ने स्पष्ट किया कि PM-KUSUM एक 'डिमांड-ड्रिवन' योजना है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की माँग और प्रगति के आधार पर फंड जारी किए जाते हैं। मंत्री ने बताया:
यही वह सवाल है जो हर किसान पूछता है। आंकड़ों को समझें: Component-A में 2 MW का सोलर प्लांट लगाने पर सालाना 16-18 लाख यूनिट बिजली पैदा होती है। अगर DISCOM ₹3 प्रति यूनिट की दर से खरीदे, तो सालाना राजस्व ₹48 लाख तक हो सकता है। ऑपरेशन-मेंटेनेंस और वित्त लागत निकालने के बाद भी शुद्ध आय ₹20-25 लाख प्रति वर्ष के स्तर पर पहुँच सकती है (यह अनुमानित आंकड़ा है, वास्तविक आय टैरिफ और स्थान पर निर्भर करती है — आधिकारिक पुष्टि नहीं)।
सरकार खुद कह चुकी है कि Component-A के कमीशन किए गए प्लांट्स में मेडियन आय ₹4.5 लाख प्रति MW प्रति माह रही है। यानी 2 MW के प्लांट से सालाना ₹1.08 करोड़ तक की आय भी संभव है — लेकिन यह मेडियन आंकड़ा है, न्यूनतम गारंटी नहीं।
जमीन लीज़ पर देने के मामले में: Component-A में किसान ₹80,000 प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक कमा सकते हैं, जबकि Component-C में यह ₹25,000 प्रति एकड़ प्रति वर्ष है।
| विवरण | आंकड़ा | स्रोत |
|---|---|---|
| कुल सौर क्षमता लक्ष्य (मार्च 2026 तक) | 34,800 MW | MNRE आधिकारिक वेबसाइट |
| केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) | ₹34,422 करोड़ | MNRE आधिकारिक वेबसाइट |
| कुल लाभार्थी (30 नव. 2025 तक) | 20,42,443 | DD News रिपोर्ट |
| बजट 2025-26 आवंटन | ₹2,600 करोड़ | IBEF रिपोर्ट |
| बजट 2026-27 आवंटन (अनुमानित) | ~₹5,000 करोड़ | The Week लेख |
| FY25 में Component-B पंप (लगाए गए) | 4.4 लाख | IBEF रिपोर्ट |
| FY25 में Component-C पंप (सोलराइज़्ड) | 2.6 लाख | IBEF रिपोर्ट |
| कुल सोलर पंप (स्थापित/सोलराइज़्ड) | 10 लाख+ | IBEF रिपोर्ट |
| Component-A: जमीन लीज़ आय | ₹80,000/हे./वर्ष | DD News रिपोर्ट |
| Component-B: डीज़ल से वार्षिक बचत | ₹60,000+ | DD News रिपोर्ट |
| Component-C: जमीन लीज़ आय | ₹25,000/एकड़/वर्ष | DD News रिपोर्ट |
Component-B (स्टैंडअलोन सोलर पंप): केंद्र सरकार बेंचमार्क लागत का 30% सब्सिडी देती है, राज्य सरकार कम से कम 30% और शेष 40% किसान का हिस्सा होता है। लेकिन किसान बैंक लोन ले सकता है — यानी शुरुआत में सिर्फ 10% नकद चुकाना होता है।
पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों (J&K, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, लक्षद्वीप, A&N द्वीप) में केंद्र की सब्सिडी 50% है।
Component-A (ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट): इसमें किसान को कोई सरकारी पूंजी सब्सिडी नहीं मिलती। हालाँकि SBI जैसे बैंक प्रोजेक्ट लागत का 70% तक लोन देते हैं। DISCOM को खरीदी गई बिजली पर 5 साल तक ₹0.40/यूनिट या ₹6.6 लाख/MW प्रति वर्ष (जो भी कम हो) का प्रोक्योरमेंट-बेस्ड इंसेंटिव (PBI) मिलता है।
मौजूदा PM-KUSUM योजना मार्च 2026 में समाप्त हो रही है। अच्छी खबर यह है कि सरकार इसे एक नए और बेहतर रूप में — PM-KUSUM 2.0 — के तौर पर लाने की तैयारी कर चुकी है। Down to Earth की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2025 में एक बड़ी स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन हुई और Expenditure Finance Committee (EFC) की मंजूरी मिल चुकी है।
Business Today की रिपोर्ट के अनुसार PM-KUSUM 2.0 में कुल आवंटन ₹50,000 करोड़ तक हो सकता है — मौजूदा ₹34,422 करोड़ से करीब 45% अधिक। नई योजना में Feeder Level Solarisation पर ज़ोर होगा, Agro-PV (खेती + सोलर एक साथ) तकनीक शामिल हो सकती है और बैटरी स्टोरेज भी जोड़े जाने की संभावना है।
यूनियन बजट 2026-27 में PM-KUSUM के लिए लगभग ₹5,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं — पिछले साल के ₹2,600 करोड़ से लगभग दोगुना।
योजना के परिणाम उत्साहजनक हैं, पर चुनौतियाँ बड़ी हैं। Down to Earth की दिसम्बर 2025 की रिपोर्ट बताती है कि Component-A में 9,964 MW स्वीकृत हुए, पर अब तक सिर्फ 667.3 MW स्थापित हो सके हैं। यानी 93% क्षमता ज़मीन पर नहीं उतरी। इसके प्रमुख कारण हैं — सब-स्टेशन के पास की जमीन का न मिलना, DISCOMs की धीमी प्रतिक्रिया और वित्त जुटाने में किसानों को कठिनाई।
Component-C की तस्वीर बेहतर है — 35.8 लाख MW के लक्ष्य के मुकाबले 10.99 लाख MW सोलराइज़ हो चुके हैं। FY25 में 25 गुना छलाँग उल्लेखनीय है।
राज्यों के बीच भी असमानता साफ दिखती है। महाराष्ट्र ने FY25 में ₹1,154 करोड़ (कुल फंड का 58%) खर्च किए, जबकि कई राज्य अभी भी पीछे हैं।
Component-B (सोलर पंप के लिए):
Component-A (सोलर प्लांट/ज़मीन लीज़ के लिए):
PM-KUSUM योजना किसान सोलर कमाई के संदर्भ में एक ऐतिहासिक बदलाव की नींव रख चुकी है। 20 लाख से अधिक किसान इस परिवर्तन के हिस्सेदार बन चुके हैं — महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा सबसे आगे हैं। Budget 2026-27 में लगभग दोगुने आवंटन और PM-KUSUM 2.0 की तैयारी इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस योजना को और बड़े पैमाने पर ले जाना चाहती है।
व्यावहारिक सलाह एकदम सीधी है: अगर आपके पास खाली जमीन है — बंजर भी चलेगी — तो pmkusum.mnre.gov.in पर जाएँ, अपने राज्य की DISCOM से संपर्क करें और आवेदन प्रक्रिया शुरू करें। 25 साल का PPA एक स्थिर और दीर्घकालिक आय का ज़रिया बन सकता है। डीज़ल पंप पर निर्भरता खत्म करें, बिजली का बिल शून्य करें — और अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई शुरू करें।