Trakr Robot ने भारत AI समिट में मचाया धमाल: खतरनाक जगहों पर अब रोबोट की तैनाती
दिल्ली भारत मंडपम AI प्रभाव शिखर सम्मेलन में एडवर्ब टेक्नोलॉजीज ने Trakr Robot प्रदर्शित किया। चार पैरों वाला क्वाड्रूपेड गोदाम तेल रिग्स रक्षा निगरानी के लिए तैयार। विशेषज्ञों ने स्वदेशी रोबोटिक्स मिसाल बताया।

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दिल्ली के भारत मंडपम में भारत AI प्रभाव शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन नोएडा की एडवर्ब टेक्नोलॉजीज ने Trakr Robot को प्रदर्शित किया। चार पैरों वाला यह क्वाड्रूपेड रोबोट गोदामों, तेल रिग्स और रक्षा क्षेत्रों में खतरे वाली निगरानी के लिए तैयार खड़ा था। समिट में इसका डेमो देखकर विशेषज्ञों ने इसे स्वदेशी रोबोटिक्स की नई मिसाल बताया।
पिछले साल लॉन्च हुए मूल ट्रैकर को अब 70-80 फीसदी स्वायत्तता देकर मजबूत बनाया गया है। पहले यह आधे-आधे ऑपरेटर पर निर्भर रहता था, लेकिन अब सेंसरों से खुद फैसले लेता है। एडवर्ब के सीईओ विमल साहू ने साफ कहा कि Trakr Robot का असल मकसद खतरनाक माहौल में जिंदगियां बचाना है। समिट में निवेशक, अधिकारी और रक्षा प्रतिनिधि इसके प्रदर्शन पर खूब चर्चा करते नजर आए।
Trakr Robot की ताकत
इस रोबोट में चार स्टेरियो कैमरे, लाइडार, डेप्थ कैमरा और आईएमयू सेंसर का जबरदस्त संयोजन है। यह सीढ़ियां चढ़ सकता है, उबड़-खाबड़ रास्ते पार कर सकता है। 5 किलो तक का लोड उठाकर 90 मिनट तक सक्रिय रहता है। जीपीएस न होने पर भी बखूबी काम करता है। जेस्चर से नियंत्रित होता है और इंसानी इरादे को पहचान लेता है। फैक्टरी फ्लोर पर डेमो में इसने जोखिम भरा डेटा इकट्ठा किया, जो इंसानों के लिए मुश्किल होता।
हल्के से भारी पेलोड वाले कई वैरिएंट उपलब्ध हैं – ट्रैकर 5 किलो के लिए फुर्तीला है, जबकि ट्रैकर 20 तक 20 किलो ले जा सकता है। कंपनी का मानना है कि Trakr Robot वेयरहाउस, मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस को हमेशा के लिए बदल देगा। दिल्ली समिट में रक्षा अधिकारी खासे प्रभावित दिखे।
कौन फायदे में रहेगा
गोदाम मालिकों और फैक्टरी संचालकों को इससे तुरंत फायदा होगा। फ्लोर जांच के दौरान होने वाली दुर्घटनाएं कम होंगी। रेलवे-मेट्रो में रात की गश्त आसान हो जाएगी। तेल-गैस के जहरीले इलाकों में सुरक्षित निरीक्षण संभव। छोटे उद्योगों के लिए 40-60 लाख रुपये का दाम जेब को भारी नहीं पड़ेगा। नतीजा – कर्मचारी सुरक्षित, उत्पादकता चढ़ेगी।
सरकारी निगाह और जानकारों की प्रतिक्रिया
आईटी मंत्रालय ने Trakr Robot को मेक इन इंडिया का जीता-जागता उदाहरण करार दिया। विमल साहू ने बताया कि पीएलआई स्कीम से बैटरी लागत घटी है। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अशुतोष राय ने एनडीटीवी से कहा, "Trakr Robot जैसी तकनीक भारत को वैश्विक रोबोटिक्स एक्सपोर्टर बना सकती है।" डिफेंस हलकों में सीमा निगरानी के लिए उत्साह है। नीति आयोग ने इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान से जोड़ दिया।
आंकड़ों की बात
भारत में हर साल 50 हजार से ज्यादा औद्योगिक हादसे दर्ज होते हैं, जिनमें 20 फीसदी जांच-पड़ताल से जुड़े। Trakr Robot 12 एक्ट्यूएटर्स और 12 जोड़ों से चलता है। इसकी स्पीड 1.2 मीटर/सेकंड, 25 डिग्री ढलान चढ़ सकता है। ग्लोबल क्वाड्रूपेड मार्केट 2026 तक 2 अरब डॉलर का होगा, भारत का हिस्सा अभी 2 फीसदी लेकिन दोगुना होने की पूरी संभावना। एडवर्ब का लक्ष्य पहले साल 500 यूनिट बेचना।
अगला कदम क्या
भविष्य में सेंसर बढ़ाकर 100 फीसदी स्वायत्तता का लक्ष्य। छह महीने में डिफेंस स्पेशल वर्जन बाजार में। सरकारी खरीद प्रक्रिया तेज करने की योजना। एशिया निर्यात पर जोर। Trakr Robot साबित कर रहा है कि भारत सॉफ्टवेयर के साथ हार्डवेयर में भी ताकत रखता है। खतरनाक काम अब रोबोट संभालेंगे, इंसान सुरक्षित रहकर तरक्की करेंगे। रोबोटिक्स से भारत की औद्योगिक क्रांति को नई गति मिलेगी।
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